Sunday, January 27, 2013

घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

भाईयो इबे इब की ताजा कविता सै यो छोरा घणा अल्बाधी अर् लाडला सै

संदीप कंवल भुरटाना

मेरे बेटा का सै गजब का टोरा
घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

और धोरे जांदी ए यो अरड़ाण लागजा सै
रो रो के नै सबके कान खाण लागजा सै
काला नहीं सै, यो सै कसूता गौरा
घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

खाण-पीण के मामले म्हं घणा हिट सै
देई म्हं भी बाप की तरिया पूरी फीट सै
मुक्का मार के करदे धरती म्हं मोरा
घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

नाचदी हाथ यो हाथ नै झाड़या करै
दस का नोट फंसदी ए पाड़या करै
टोक नहीं लागै गलै म्हं बाधै काला डोरा
घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

पतली बात लिखे संदीप नहीं लिखे मोटी
भुरटाणे म्हं तारे यार सै गजब की कोठी
म्हारे कुणबे खातर सै यो चंदन का पोरा
घणा मस्त रह्या करै मेरा छोरा

जब जेल तै बाहर तारा बाप होगा

संदीप कंवल भुरटाना

इस सरकार का सूपडा साफ होगा
जब जेल तै बाहर तारा बाप होगा

धोखे तै जिसने भी फंसाया जनसेवक
डन बाप-बेटा का भी ईनाम खास होगा

ताम् सारे कूणां म्हं बड़-बड़ रोवोगे
जद तारा प्रस्ताव म्हारी कोर्ट म्हं पास होगा

बस एक साल की बात रहगी सै इब
तारा हर फैसला फेर बकवास होगा

अगला सीएम भी इनेलो का ए बणना सै
फेर कां्रगेस का हाथ नहीं म्हारा थाप होगा

जेल म्हं चिट्ठी भेजी सै किसान पुत्र नै
उसके हर एक शब्द पै तारा नाश होगा

कह संदीप भुरटाणे आला साच्ची बात रै
हर घास का नाम कांग्रेस घास होगा

Monday, January 14, 2013

नाश जाइयो उनका जिन्नै करा सै गैंगरेप

संदीप कंवल भुरटाना




नाश जाइयो उनका जिन्नै करा सै गैंगरेप

कोए जाणै भी सै यो काम होया क्यूं सै।।



रात नै फिल्म देखणी के जरूरी थी यारो

... बिना काम उन्नै यो झगड़ा झोया क्यूं सै।।



घणा बड़ा जुल्म करा सै जालिमां नै छोरी गैल

इलाज करदी हाण डाक्टर भी रोया क्यूं सैं।।



दिल्ली म्हं जाकै कट्ठे होरे सै लोग-लुगाई

हराम खोरा नै बीज बिघन का बोया क्यूं सै।।



फांसी नहीं होनी चाहिए इन काले मुंह आलां की

तड़फा के मारो सालां नै, पूंछै यो लोया क्यूं सै।।



पश्चिमी संस्कृति का झटका देखण लागरे सां हाम

Thursday, December 20, 2012

मस्त जवानी छोरां की, नशा म्हं छोरे खुरे।

स्ंादीप कंवल भुरटाना

मस्त जवानी छोरां की, नशा म्हं छोरे खुरे।

काॅलेज, कैंपस के दिनां म्हं, होज्यंा इसतराले पूरे।।

छोरी नअ् इसारै म्हं, एकदम आंख घुमाई,

बाहरनअ् आकै देखा तो, कैन्टीन म्हं बैठी पाई,

दो-चार बात मारी उसतै, फेर चा भी पियाई,

सण्डे आला् दिन फिल्म दिखाण की, हां भी भरवाई,

जी आया नूं फिल्म म्हं, सरदार बांधरे तुरे।

काॅलेज, कैंपस के दिनां म्हं, होज्या इसतराले पूरे।।


छोरा का तो कै कहणा, मोटरसाइ्रकल पै आवैं रै,

एक समोसा, दो पेटीज खुवाके, कुटिया म्हं घुमावैं रै,

एक आधी बार भुंडी बणजा तो, होटल म्हं फंस जावैं रै,

बेज्जती तै डरदे घरके भी, ब्होत घणे रूपए लावैं रै,

छोरा नअ् छुटवांव रै, ये किस्से रहगे अधूरे।

काॅलेज, कैंपस के दिनां म्हं, होज्या इसतराले पूरे।।


एक छोरी कहवै बेबे, छोरा यो तो ठीक सै,

चम्मनी तक लाव कोना, यो तो पूरा ठीठ सै,

कहया पाछै काम करै ना, काढ़दे तीन लिख सै,

कितै खड़ा हो तो काम बिगड़ज्या, मारदे यो छीक सै,

आंदी-जांदी नै छेडरै, लैके हाथा म्हं पिलुरै।

काॅलेज, कैंपस के दिनां म्हं, होज्यंा इसतराले पूरे।।



काॅलेज के दिनां म्हं, देखा यो भी चाला् रै,

छोरी-छोरी भिड़ती देखी, कती मांडरी पाला रै,

दोनंू कहवैं मेरा-मेरा, माहरा राम रूखाला रै,

संस्कृति का धूमा ठा दिया, होग्या जान का गाला रै,

कह् सन्दीप भुरटाणे आला रै, होग्ये मेरे पूरे।


काॅलेज, कैंपस के दिनां म्हं, होज्यंा इसतराले पूरे।।

एक दूसरी नै ये पूछें, तू किसा कअक छोरा चाहव सै,

तावली बतादे नै बेबे, क्यूं घणी बार लगाव सै,

सन्दीप सै वो तो, कसूता तो लखाव सै,

सबेरे पहलां मन्नै वो, करके फोन जगाव सै,

भरा होस्टल कै म्हं छोरी, बड़े-बड़े छोडै सुरे।

मस्त जवानी छोरां की, नशा म्हं छोरे खुरे।

काॅलेज ,कैंपस के दिनां म्हं, होज्यंा इसतराले पूरे।।



Wednesday, May 9, 2012

जड भी जावां हाम औडे छाया करां

गाम गुवांड म्हं नाम होरा सै आपणा
जड भी जावां हाम औडे छाया करां

किसा ए टोपिक चालरा हो किते भी
 उसे पै एंडी चुटकला सुणाया करां


जै रोण नै होरे किसे बात पै सारै
सुणा के कविता सबनै हंसाया करां

जै नाम लेके चुटकला सुणांदा हो
इज्जत उसकी तार बगाया करां


आदमी गैलयां दस मिनट बतलादी ए
उसपै एक गजल जिदे बणाया करां
 

संदीप का काम लिखण का रहगा इब
फसजा माईक किते धूमां औडे ठाया करां

हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

आपणे सुख दुखां नै नुए कटठे होके बांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

हरि का आडे आणा भाई नाम धरा हरियाणा
उसे टेम तै आज तई सै दूध दही का खाणा
चूरमा टिंडी खा-खा कै नुए आंगली चांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

तीज त्योहार हाम सारे मिल के मनावां सां
हर टेम म्हारी संस्करिति नै आगै लावां सां
बस हरियाणवी हो बात नुए देशी रंग छाटांगे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे



खेल कूद और पढाई म्हं सारे आगै जारै सां
 कद बण हरियाणवी भाषा जोर घणा लारै सां
 सारै जणे मिलके आपणे सुख दुख साटांगे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

हरियाणा आलां की बात होव लोह लाट सै
संदीप कंवल भुरटाणे आला कररया ठाठ सै
ठाठ बाट तै सारी उम्र ऐश तै काटांगे
आपणे सुख दुखां नै नुए कटठे होके बांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

Wednesday, March 21, 2012

गांेसा म्ह सिमट के रहगी

भैंस का चौथ गाय की थेपडी म्हं चिपट कै रहगी
मेरी लुगाई की जिंदगी गोसां म्हं सिमट के रहगी

पांच बजे उठदी ए चाली, गोबर कानी चालै सै
सारा ठाण भार कै, फेर तासले म्हं घालै सै
हाथां की लकीरां म्हं उसके गोबर लिपट के रहगी
मेरी लुगाई की जिंदगी गोसां म्हं सिमट के रहगी

छोटी थेपडी, बडा गोसा, इन्नै का जिकरा राखै सै
कोण सी भैंस मारै चैथ, हरदम ठाण कानी झाकै सै
पक्का फर्श नहीं करण देंदी वा खांचे म्हं रिपट के रहगी
मेरी लुगाई की जिंदगी गोसां म्हं सिमट के रहगी

रोज बेरण खेत म्हं जाकै, जई, बाजरी बरसम लावै सै
फेर चाली कहके हांसे, इब तो पतला गोबर आवै से
हर किते जिकर चलावै से सबेरे नलके उपर फहगी
मेरी लुगाई की जिंदगी गोसां म्हं सिमट के रहगी

दौ सौ गज का प्लाट म्हं, गोसे नहीं सै थोडे
तारी भाभी नै भाईयो ला राखै सै दस बिटोडे
यो संदीप तन्नै समझावै सै, बोली क्यातैं तु रै बहगी
मेरी लुगाई की जिंदगी गोसां म्हं सिमट के रहगी